(मोमिनिन को जिकरे कशीर का हुकुम है)
कुरआन पाक मै मोमिनिन को जिकरे कशीर का हुकुम दिया गया है! इरशादे बारी तआला है!
(या अय्यूहल लजीना आमनु जिकरुल्लाह जिकरन कशीरा) (सुरये अल अहजाब आयत no 14)
तर्जुमा:- ऐ ईमान बालो अल्लाह का जिक्र कसरत से करो!
एक जगह इरशाद फ़रमाया!
(वा जिकरुल्लाह कसीरान अलकुम तफलाहून) (सुरये अल ज़ुमाअ आयत no 10)
तर्जुमा :- और अल्लाह का जिक्र कसरत से करो ताकि तुम कामयाब हो जाओ!
इस आयत मै जिक्रो जमा का सेगा भी है! और उमर का भी मोमिनिन को जिकरे कशीर का हुक्म दिया जा रहा है! मजीद ये कि जिकरे कशीर करने बालो के साथ मगफिरत और जन्नत का वादा किया जा रहा है!
अब सवाल पैदा होता है! कि जिकरे कशीर का किया मतलब है! किया हर नमाज़ के बाद थोड़ी देर जिक्र कर लिया करें! या सुबह व शाम जिक्र किया करें!
या इतना जिक्र करें! कि थक जाये! आखिर किया करें! इस आयत के तहत मुफससिरीन मै से हज़रत मुजाहिद रहमतुल्लाह अलैह जिकरे कसीर कि तारीफ यूँ बयान करते है!
(अल जिकरल कशीर अन ला यंशाह बिहाल)
तर्जुमा :- जिकरे कशीर ये है! इसे किसी हाल मै भी न भूले
किसी हाल मै भी भूलने से मुराद किया है! इंसान कि तीन बुनियादी हालते है! या वो लेटा होगा! या बैठा होगा! या खड़ा होगा!
हर हाल मै जिक्र करने से मुराद लेटे बैठे खड़े अल्लाह को याद करें! यही अकल मंदो कि निशानी बताई गयी है! कुरआन पाक मै (वलऊ अल बाब) अकल मंदो के मुताल्लिक फ़रमाया गया है!
(अल लजीना यज कुरु नल्लाहा फयामम व काऊदा व अला जूनूबिहीम)
तर्जुमा:- वो बन्दे जो खड़े बैठे और लेटे अल्लाह का जिक्र करते है!)
अल्लाह तआला ने अपनों बन्दों पर जो चीज भी फ़र्ज कि है! इस के लिए अल्लाह तआला ने हद मुकररर करदी है! और हालत अजर मै इनको माअजूर समझा है!
सिबाये मजनून के इसलिए इनको अल्लाह ने हर हाल मै जिक्र के लिए अमर किया है! और बताया है! कि कि मोमिन याद करते है! अल्लाह को खड़े हुए!
और बैठे हुए! और अपनी करबटो पर और इस मै इशारा है! इस उमर कि तरफ कि जिक्र कि शान और इसकी फज़ीलत बहुत बढ़ी है!
(जिक्र के फायदे)
कसरत जिक्र कि फवाइद भी अजीब गरीब है! चंद एक बयान किये जाते है!
(जिक्र दिल कि सफाई का बाइस है!)
जिक्र का सबसे बढ़ा फायदा तो ये है! कि इससे इंसान के दिल कि जुल्मत दूर होती है! और आदमी को कलवे सलीम नसीब होता है!
चुनाँचे हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रजि अल्लाहो तआला अन्ह से रिबायत है! कि नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि बसल्लम ने इरशाद फ़रमाया!
(लकल शी सकालाह व सकालतल कुलूब जिकरुल्लाह)
तर्जुमा :- हर चीज का एक सेकल होता है! और दिल का सेकल सफाई अल्लाह का जिक्र है!
जब दिल साफ हो! रोशन हो! तो इसको इबादत मै लज्जत मिलती है! और खेर कि हर बात इस पर असर करती है!
और दिल साफ न होतो कसादत कल्ब के बाइस खैर कि बात दिल पर असर नहीं करती और न वो इबादत व ताअत कि तरफ माइल होता है!
(जाकिर को अल्लाह तआला याद रखता है!)
अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है!
(फजकुरूनी अजकुरकुम) सुरये अल बकरा आयत no 152
तर्जुमा :- तुम मुझे याद करो मै तुम्हे याद करूँगा!
इस आयत मै जो खुसखबरी है! अहले जिक्र के लिए कि जब वो जिक्र कर रहे है! होते है! यानी अल्लाह को याद कर रहे होते है! तो अल्लाह तआला भी उन्हें याद कर रहा होता है!
मोहब्बत दोनों आलम मै यही जाकिर पुकार आयी जिसे खुद यार ने चाहा इसी को यादे यार आयी
(जिक्र कि वजह से अजाबे क़ब्र से निजात)
क़ब्र कि घाटी मै भी जिक्र का नूर काम आएगा! और आदमी क़ब्र के अजाब से महफूज रहेगा!
हज़रत माज बिन जबल रजि अल्लाहो तआला अन्ह से रिबायत कि नबी ऐ अकरम सल्लल्लाहु अलैहि बसल्लम ने इरशाद फ़रमाया!
अल्लाह तआला ने जजिक्र से बढ़ कर किसी आदमी का कोई अमल अजाबे क़ब्र से निजात दिलाने बाला नहीं है!

एक टिप्पणी भेजें