बिस्मिल्लाह पढ़ने कि आदत डाले/Bismilla Padhne Ki Aadat Daale Bayan Lyrics



   (बिस्मिल्लाह पढ़ने कि आदत डाले!) 

अब एक बिस्मिल्लाह पढ़ने कि आदत डाल लीजिये! तो कितने मोके है! जहाँ इंसान सैतान के असरात से बच जाता है! 

बिस्मिल्लाह कि आदत बच्चे को बचपन मै सिखानी चाहिए! हर अच्छे काम को करते हुए! बिस्मिल्लाह पढ़ो! दरवाजा खोलते हुए बिस्मिल्लाह गाढ़ी मै बैठना है! बिस्मिल्लाह खाना खाना है!

 बिस्मिल्लाह हर अच्छा काम करते हुए अगर बिस्मिल्लाह कि आदत पढ़ जाये! छोटा सा अमल है! लेकिन देखिए इस पर कितने अच्छे असरात बन्दे को मिलते है! तो मालूम हुआ अगर हम अपनी ज़िन्दगी मै फलाह चाहते है! 

तो हमें नेक आमाल को अपनाना पढ़ेगा! फिर हम शैतान के असरात से बच जायेंगे! और अगर आमाल नहीं होंगे! तो हम दुनिया मै भी नहीं बच सकते है! और आख़रत के अजाब से भी नहीं बच पाएंगे! 

           (दीन इस्लाम का हुस्न)

हमें चाहिए! कि हम अल्लाह के बन्दों से अल्लाह के लिए मोहब्बत करें! एक रिबायत मै आया है! कि (अलखलक अयालुल्लाह) कि मखलूक अल्लाह तआला कि अयाल है!

 याद रखना कि जो अल्लाह तआला कि अयाल से मोहब्बत करता है! अल्लाह तआला इस बन्दे से मोहब्बत फरमाता है! इसलिए फ़रमाया! (रहमू फिल अर्द यर हमकुम मिन फिस समाये) तुम रहम खाओ जुज मै पर है! हम पर वो रहम करेगा! जो परबर दिगार आसमानो मै है! इसलिए अगर हम चाहते है!

 कि अल्लाह तआला हम पर रहम फरमाए! तो फिर हमें चाहिए! तो हमें चाहिए कि हम अल्लाह के बन्दों पर रहम करें! अल्लाह के बन्दों से अल्लाह कि निस्बत से मोहब्बत रखे!

 दीन इस्लाम का हुस्न देखिये! कि एक तो मोमिन से मोहब्बत करना होती है! ये तो बढ़ी बात है! ये तो होना हि चाहिए! आम इंसानो से भी रहम से पेश आने कि तलकीन कि गयी है! 

     (जन्नत मै पहुँचाने बाला अमल)

तबरानी सरीफ कि रिबायत है! कि एक सहाबी रजि अल्लाहो तआला अन्ह ने अल्लाह के महबूब सल्लल्लाहु अलैहि बसल्लम कि खिदमत मै हाजिर हो कर अर्ज किया!

 ऐ अल्लाह के नवी सल्लल्लाहु अलैहि बसल्लम मुझे कोई ऐसा अमल बता दीजिये! जिसके करने से मुझे जन्नत मिल जाये! नवी सल्लल्लाहु अलैहि बसल्लम ने फ़रमाया!

 गुस्सा न किया कर अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इस अमल कि वजह से तुझे जन्नत अता फरमा देगा! हदीस पाक मै आता है! जो जन्नत मै ऊँचे महल और ऊँचे दरजात चाहता है! 

इसको चाहिए! कि जो तोड़ें इससे बो जोढ़े! जो महरूम करें! उसे वो अता करें! जो जुल्म करें! इसको वो माफ़ करदे! यानी इन तीन काम करने वाले बन्दों को ऊँचे महल और ऊँचे दरजात नसीब होंगे! 

    (ईमान जाया करने बाला अमल)

नवीये करीम सल्लल्लाहु अलैहि बसल्लम ने इरशाद फ़रमाया!

  (इन गजब ली फसद ईमान कमा यफ़सीदल सबरुलअसल)

कि गुस्सा ईमान को इस तरह ख़राब कर देता है! जिस तरह कि एलवा सहद को ख़राब कर देता है! तो जिस तरह एलवा शहद को ख़तम कर देता है! जाया कर देता है!

 उसी तरह गुस्सा ईमान को जाया कर देता है! इसलिए हमारे अकाबिर गुस्सा दिलाने के बाबजूद भी बिला वजह इस्तेमाल मै नहीं आते थे! और गुस्से मै भी अपने आप को काबू रखा करते थे! 

  (रूहानी तदावीर किताब)

हज़रत मौलाना पीर ज़ूलफिकार अहमद साहब नक्सबंदी 
मौलाना मुहम्मद रुहुल्लाह नक्सबंदी गफूरी 

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