तौवा नसूह के लिए चार काम
इंसान को चाहिए कि वो अपने तमाम गुनाहो से तौवा करें! तौवा कैसे करें! इसके लिए चार काम मंदरजा जेल है!
पहला काम :- ये करें! कि जो गुनाह हो चुके हो! उन पर दिल मै नादिम और सरमशार और आइंदा गुनाह न करने का इरादा हुआ!
दूसरा काम :- ये करें कि वो अपने दिल को हसद और कीने से खाली करले! कियु कि गुनाह से जब तौवा कर रहा है! और सीना कीने से भरा हुआ है!
तो वो तौवा भला किया फायदा देगी! लिहाजा इसके दिल मै मोमिन के बारे मै अंजाम नफरत दुश्मनी न रहे! वो सब को अल्लाह के लिए माफ़ कर दे!
तीसरा काम :- ये करें कि वो फाशिक व फाजिर लोगो से हमेशा के लिए अलग हो जाये! हम रोजाना बित्र मै अल्लाह तआला से अहद करते है!
तर्जुमा :- ऐ परबर दिगार हम जुदा होते है! और छोड़ते है! हर इस बन्दे को जो फासिक और फाजिर है!
हम रोजाना रोजाना रात को इशा के बख्त खड़े होकर नमाज़ मै अल्लाह तआला से हाथ बाँध कर वादा करते है! और दिन फिर उन्ही लोगो के साथ गुज़ार रहे होते है!
इसका मतलब ये नहीं कि अब इनसे कोई ताल्लुक हि नहीं रहेगा! चाहे रिस्तेदारी हि हो! नहीं बल्कि इसके साथ दोस्ती ख़तम कर दे! लेन देंन का मामला तो हर एक के साथ करना हि होता है! वो तो काफ़िरो के साथ भी करते है!
मगर एक होता है! दोस्ती का ताल्लुक कल्ब का ताल्लुक वो तोड़ ले! और ये मतलब भी नहीं कि अब इसको सलाम भी कभी नहीं करना नहीं बल्कि जो उसूल सरियत ने बना दिए है!
उनकी हुदूद मै रहे! अगर फिर भी बदकार लोगो के साथ सोहबत रहेगी तो फिर तौवा क़ुबूल नाहि होंगी और वो लोग फिर गुनाहो मै मलवस कर देंगे! इसकी मिसाल ऐसे हि है!
जैसे कोई गन्दी नाली मै पढ़ा हो तो उसके ऊपर वही पानी डालने से कुछ नहीं होता इसको नाली से निकाल कर पाक पानी मै डाले तो फिर वो साफ होगा!
इसी तरह हम अगर अपने दिल को पाक करना चाहते है! तो फासिक व फाजिर लोगो कि गन्दी नाली से अपने आप को बचाना पढ़ेगा!
फिर अगर इस पर अल्लाह के जिक्र के चंद कतरे पढ़ जायेंगे! तो ये दिल पाक साफ हो जायेगा!
हमें चाहिए कि हम अपने कॉल का पास करें! जो हम रोजाना अपने पर्वरदिगार के सामने कह रहे होते है!
चौथा काम :- ये करें कि मौत कि तैयारी मै लग जाये! जिस बन्दे ने ये चार काम कर लिए! वो समझ गया कि अल्लाह तआला ने मुझे भी तोवतन नसूहा कि तौफीक अता फरमा दी है!
तोवतन नसूहा के चार इनआमात
जब बंदा तोवतन नसूहा कर लेटा है! तो इसके जवाब मै अल्लाह तआला भी चार काम कर देता है!
(1) अल्लाह तआला इस बन्दे से मोहब्बत करने लग जाता है! हदीस पाक मै फ़रमाया गया
तर्जुमा :- गुनाहो से तौवा करने बाला अल्लाह का दोस्त बन जाता है!
(2) अल्लाह तआला इसके गुनाहो को इस तरह मिटा देता है! जैसे इसने कभी कोई गुनाह किया हि नहीं चुंकि वो अल्लाह तआला के सामने सच्ची तौवा कर लेता है!
इसलिए अल्लाह तआला कि मदद और नुसरत इसके साथ शामिल हो जाती है! और अल्लाह तआला इस बन्दे को आइन्दा शैतान के करीब और हथकंडो से बचा लेता है!
(3) (अन इबादी लेस लका अलैहिम सल्तन)
तर्जुमा :- ऐ मरदूद जो मेरे बन्दे होंगे इन पर तेरा कोई बस नहीं चल सकता
इसका किया मतलब किया वो फरिश्ता बन गया किया इससे कोई गुनाह शादीर हि नहीं हो सकता नहीं नहीं इसका मतलब ये है! कि अब भी इससे कोई ऐसा गुनाह तो हो सकता है!
कि जिसकी वजह से वो अल्लाह तआला कि निगाहो मै गिर जाए! या इसे अल्लाह के दरबार से धतकार दिया जाये! लेकिन इससे कोई छोटी मोटी खता हुयी भी तो फ़ौरन इससे तौवा करके माफ़ी मांग लेगा!
(4) ऐसे बन्दे को अल्लाह तआला उसकी मौत से पहले फरिश्तों को भेज कर इस के अच्छे अंजाम कि खुसखबरी सूना देते है!
(ता तंजीलु अलैहिमूल मलाइका अला ताखाफू वला ताहजनु व अबसरु बल जन्नह लती कुंतुम तू आदून)
तर्जुमा :- इन पर फ़रिश्ते उतरते है! कि तुम मत डर और न गम खा और जन्नत कि जिसका तुमसे वादा था!
तौवा करते रहिये करते रहिये! हत्ता कि इतनी बार तौवा कीजिये! कि शैतान थक जाए! और ये कहे कि ये कैसा बंदा है! कि मै बार बार मेहनत करके गुनाह करबाता हूँ!
और ये तौवा करके सब पर पानी फेर देता है! ये भी याद रखे कि इंसान अपने आमाल पर भरोसा न करें बल्कि अल्लाह तआला कि रहमत पर भरोसा करें!

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