हुस्ने नियत पैदा कीजिये! पोस्ट नंबर 1 /Husne Niyat Paida Keejeeye Lyrics Bayan post no 1
हुस्ने नियत पैदा कीजिये!
🌹मोमिन कि नियत का मुकाम🌹
नवी अलैहिस्सलाम इरशादे गिरामी है!
(इन्नमल आमालू बिन नियती)
आमाल का दारो मदार नियतो पर है!
एक दूसरी हदीस पाक मै फरमाया!
(नियहुल मुअ मिनी ख़ई रम मिन अमालिही)
मोमिन कि नियत इसके अमल से भी ज्यादा अच्छी होती है!
तालीवे इल्म को ये बात समझने मै जरा मुश्किल पेश आती है! मगर हकीकत यही है! कि नियत अमल से ज्यादा बेहतर होती है! उलमा ने इसकी कई वुजुहात लिखी है!
(1) सबसे पहली बात तो ये है! नियत करने से मोमिन को अज्र मिलता है! और उसकी नेकी लिखी जाती है! भले बाद मै उसके अमल मै रिया निकले या किसी वजह से इसका अमल क़ुबूल ना हो! लेकिन नियत के करने से इसी बख्त इसके ना मायें आमाल मै नेकी लिख दी जाती है!
(2) दूसरी वजह ये है! कि नियत के अंदर दवाम होता है! और अमल के अंदर दवाम नहीं होता कोई भी अमल करें! वो महदूद होगा लेकिन नियत कि कोई हद नहीं मिसाल के तोर पर एक आदमी ने ये नियत कर सकता है! कि जब तक मेरी जिंदगी है!
मै तहज़जूद कि नमाज़ पढ़ूंगा! अगर उसकी जिंदगी सो साल हो तो ये नियत सो साल तक ही होंगी और इससे भी ज्यादा है! तो नियत भी ज्यादा मुद्दत तक मुहीत हो जाएगी! इस दवाम कि वजह से नियत अमल से ज्यादा अफ़ज़ल होती है!
(3) यहाँ एक नुकता समझने कि जरूरत है! इंसान जो भी आमाल करता है! वो महदूद होते है! लेकिन इसको इसके बदले मै जन्नत मिलेगी! इसमें वो हमेशा हमेशा रहेगा! इसी तरह इंसान जितने भी गुनाह करता है!
वो महदूद होते है! लेकिन जहन्नुम का अज़ाब हमेशा हमेशा मिलता रहेगा! यानी काफिर ने कुफ्र तो महदूद उमर के लिए किया मगर हमेशा हमेशा अजाब मिलेगा उलमा ने इसकी यही वजह बताई कि अगर चे मोमिन महदूद अमल करता है! मगर उसकी नियत ये होती है!
कि जब तक मेरी जिंदगी है! मै अपने परबर दिगार कि फरमा बरदारी करूँगा! इस लिए वो हमेशा हमेशा के लिए जन्नत मै रहेगा! और काफ़िर कि नियत ये होती है!
मै अल्लाह को नहीं मानता या फिर इसके साथ किसी को शरीक बना दिया! इस नियत कि वजह से इसको हमेशा हमेशा के लिए जहन्नुम का अजाब दिया जायेगा!
(4) इसकी तीसरी वजह ये है! कि नियत कल्ब का अमल है! इस कल्ब को पूरे जिस्म मै फजीलत का मुकाम हासिल है! कियु कि वहां पर इंसान को मार्फ़त हासिल होती है!
लिहाजा कल्ब का अमल वाकी तमाम जिस्म के आअजा के अमल पर फज़ीलत रखता है! इस लिए हमेशा अपनी नियतो को टतोलते रहना चाहिए!
इनकी निगरानी करते रहना चाहिए! कि हम जो काम कर रहे है! किया वो वाकई वो अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के रजा के लिए कर रहे है! या इसमें कोई कोई और मकसद भी है!