तदवीर no 3
आज़िज़ी और इंकिसारी अपनाये!
(आज़िज़ी का मतलब)
नवी अलैहिस्सलाम ने इरशाद फ़रमाया!
(अल अज़जू फखरी = आज़िज़ी मेरा फखर है!)
बाद रिबायत मै अल फकरु फखरी (फ़कीर मेरा फ़ख़्र है!) भी आया है! मगर साहब मजमाअ उल बहार ने अल अज्जू फखरी कि भी तस्दीक कि है!
किसी के सामने अपने आप को कम समझना और इसके साथ इस तरह पेश आना जैसे कोई किसी बुरे के साथ पेश आता है!
आज़िज़ी कहलाता है! आज़िज़ी अफजल तारीन इबादतों मै से है! बसर्ते ये सरियत के मुताबिक हो!
(एक जामियूल आदाब)
सरियत ने नमाज़ को एक बहतरीन अमल कहा है! अगर आप गौर करें! कि नमाज़ पूरी कि पूरी आज़िज़ी हि कि मिसाल है!
एक आदमी कैसे बढे को देख कर तीन तरह से उसका अदब करता है! या तो वो उसे देख कर खड़ा हो जायेगा! या उसके सामने झुक जायेगा! या फिर उसके कदमो मै पढ़ जायेगा!
नमाज़ इन तीनो तरीको का मजमुओ है! कयाम मै इंसान अदब के साथ अल्लाह तआला के सामने हाथ बांधकर खड़ा होता है! रुकू मै अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के सामने झुक जाता है!
और सजदे मै इंसान अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के सामने अपनी पेशानी ज़मीन पर टेक देता है!
(तकब्बूर कि सना ख़त)
इंसान कि ये फितरत है! कि उसे कोई क़ामयाबी मिले या इसकी मर्जी के मुताबिक काम हो जाये! तो वो अपने आप को कोई चीज समझना शुरू कर देता है!
इसके अंदर मै आ जाती है! ये मै इंसान के लिए बहुत हि नुक्सान देह होती है! कियु कि नबीये करीम सल्लल्लाहु अलैहि बसल्लम ने इरशाद फ़रमाया!
(ला यद खुलुल जन्नह मन काना फी कलबिही मिसकाला जर रतिन मिन किबरी)
तर्जुमा :- वो शख्स जन्नत मै दाखिल नहीं हो सकता जिसके दिल मै जर्रा बराबर भी तकब्बूर हो!
अंग्रेजी मै जर्रा ऐटम को कहते है! इससे ये मालूम हुआ कि ये एक ऐटमी बीमारी है! जिस तरह लोग ऐटमी हथियारो से डरते है! कि ये बहुत ज्यादा तवाही फैलाते है!
उसी तरह तकब्बूर भी इंसान कि रूहानियत मै बहुत ज्यादा तवाही फैला देता है! आप गौर कीजिये कि शैतान जिनो मै से था! और बढ़ा इबादत गुज़ार था!
हत्ता कि वो ताऊसूल मलाइका कहलाता था! लेकिन इसको अल्लाह तआला ने अपने दरबार से धुतकार दिया और फ़रमाया
(फखरुज मिन्हा फा इन्नका रज़ीम)
तर्जुमा :- निकल जा यहाँ से तू मरदूद है!
अल्लाह के दरवार से इसको निकलने का किया सबब बना इसका तकब्बूर दरबारे इलाही से निकलने का सबब बना! अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने इरशाद फ़रमाया
(असजुदू आदम) आदम अलैहिस्सलाम कि तरफ सजदा करो लेकिन इसने इंकार किया और तकब्बूर किया! वा काना मिनल काफीरीन और न मानने बालो मै से बन गया! पता चला कि तकब्बूर एक ऐसी बुरी चीज है!
जो इतने इबादत गुज़ार बन्दे को भी अल्लाह कि बारगाह से मरदूद कर देती है! अल्लाह तआला ने इसकी हज़ारो साल कि इबादत मै ठोंकर लगा दी!

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