हुस्ने नियत पैदा कीजिये! पोस्ट नंबर 3/ Husne niyat paida keejeeye post no 3 lyrics

 

तमन्ना जो पसंद आ गयी! 

इमाम अहमद बिन हंबल रहमतुल्लाह अलैहि का एक पढ़ोसी लोहार था! वो फोत हो गया! उसको किसी ने खुआब मै देखा जी आगे किया बना कहने लगा! 

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त कि रहमत हो गयी! और मुझे बख्स दिया गया! और मुझे इमाम अहमद बिन हंबल रहमतुल्लाह अलैहि के दर्जे मै पहुंचा दिया गया!

 वो सुनकर बढ़ा हैरान हुआ! इसके बाद उसकी आँख खुल गयी खुआब देखने वाले खुद भी मुहद्दीस और आलिम थे! वो सोचने लगे कि इसके अहले खाना से पूछना चाहिए!

 इस का कोनसा कोई ख़ास अमल है! जो अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त को पसंद आ गया! चुनाँचे जब उन्होने जब उसके अहले खाना से पूछा तो उन्होने कहा कि जैसे एक आम मुसलमान कि जिंदगी होती है!

 ऐसे हि उनकी जिंदगी थी! फिर उन्होंने बताया कि मैं इस वजह से पूछ रहा हूँ! चुनाँचे इनके अहले खाना ने इनको बताया कि मैंने इन मै दो बाते बढ़ी अजीब देखि एक तो ये कि इनके दिल मै अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त का अहतराम बहुत था!

 यहाँ तक कि जब ये लोहा कूट रहे होते थे! और हथोड़ा मारने के लिए सर के ऊपर से उठाते अगर एन इस बख्त अज़ान कि आवाज अल्लाहु अकबर आती तो ये उसी बख्त हथोड़े को नीचे रख दिया करते थे! कि अब मेरे परबर दिगार ने बुला लिया है! अब मै पहले इसका हुकुम पूरा करता हूँ! 

दूसरा यह कि जब ये थके हुए घर आते थे! और रात को देखते थे! कि इमाम अहमद बिन हंबल रहमतुल्लाह अलैहि अपनी छत के ऊपर इबादत करते है! 

तो ये हसरत और अफ़सोस के साथ सर्द आंहे भरते थे! और कहते थे! कि मै किया करू मेरे बच्चे ज्यादा है! अगर मै काम नहीं करूँगा!

 तो इन बच्चों के लिए कैसे इंतजाम होगा! अगर मेरी पीठ हलकी होती मुझ पर बच्चों का ये बोझ ना होता और मै बकत फारिग कर सकता तो मै भी इमाम अहमद बिन हंबल रहमतुल्लाह अलैहि कि तरह राते गुज़ारता 
वो मुहद्दीस फरमाने लगे!

 हा इनका अमल ये ऐसा था! कि इसके दिल के इखलास कि वजह से रब्बे करीम ने जन्नत मै उसे वही वही दर्जा अता फरमा दिया! जो इमाम अहमद बिन हंबल रहमतुल्लाह अलैहि को अता फरमाया था! 

इससे पता चला कि इंसान एक अमल खुद तो नहीं कर सकता लेकिन उसके अमल के करने कि तमन्ना तो दिल मै रख सकता है! न हम नेक तो नहीं बन सके मगर तमन्ना तो रख सकते है! 

न हम सर से लेकर पाओ तक अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त कि मुताबिक नहीं बन सके लेकिन तमन्ना तो रख सकते है! तो नियत कर लेने से बसा औकात इंसान को वो नेअमते मिल जाती है! जो अमल पर भी इस को नहीं मिला करते 

        (रूहानी तदावीर किताब)

हज़रत मौलाना पीर ज़ूलफिकार अहमद साहब नक्सबंदी 
मौलाना मुहम्मद रुहुल्लाह नक्सबंदी गफूरी 

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