क़यामत के दिन कि हाजरी/kayamat Ke Din Ki Haajri Lyrics Bayan

   

     (क़यामत के दिन कि हाजरी)

क़यामत के दिन ऐसे लोग लोग अल्लाह के हुज़ूर पेश होंगे! जिनकी जुबान से बीस बीस साल तक क़ुरआन के सिवा कोई लफ्ज़ नहीं निकला था! 

वहां अगर हम अपनी बे बकूफाना और जाहिलाना गुफ़्तगू के साथ पेश हुए तो हमें कितनी नदामत होंगी! अगर रब्बुल इज़्ज़त ने हमसे पूछ लिया! कि बताओ तुमने फला को जलील कियु कहा था! फला को कमीना कियु कहा था! 

फला को बे ईमान कियु कहा था! वहां जवाब देना मुश्किल हो जायेगा! वहां तो अम्बिया भी ठहराते होंगे! शेख अब्दुल कादिर जिलानी राहमातुल्लाह अलैह अपनी शेहरा आफॉक किताबें गनीतल तालेबीन मै लिखते है! 

क़यामत के दिन अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त अपने जलाल मै होगा! नफसा नफ़सी का आलम होगा! अल्लाह तआला इशाईयों से पूछेगा! कि तुमने मखलूक को मेरा शरीक कियु बनाया!

 वो हज़रत ईशा अलैहिस्सलाम का नाम लेंगे! कि इन्ही ने कहा था! तो अल्लाह तआला हज़रत ईशा अलैहिस्सलाम से पूछेगा! (अंता कलत) किया आपने कहा था!

 जब हज़रत ईशा अलैहिस्सलाम से खिताब होगा! हेबते इलाही के मारे इनके बदन के हर एक बाल से खून का कतरा निकलेगा! जब सच्चों के साथ ये मामला होगा! 

वहां हम जैसे झूठो का किया हाल होगा! आज जुबान से उलटी सीधी बाते निकालना आसान है! मगर क़यामत के दिन जवाब देना मुश्किल काम है! 

     (जहन्नुम मै कौन लोग जायेंगे!)

रसूललुल्लाह सालाल्लाहों अलैहे बसल्लम से एक मरतवा सवाल किया गया! ऐ अल्लाह के नवी सालाल्लाहों अलैहे बसल्लम अक्सर इंसान किस वजह से जहन्नुम मै जायेंगे!

 अल्लाह के नवी सालाल्लाहों अलैहे बसल्लम ने फ़रमाया! दो आज़ा कि बद परहेजी से यानी (मावीन लहिया व मावीन रजिला) यानी वो चीज जो जबडो के दरमियान है! 

यानी जुबान और वो चीज जो रानो के दरमियान है! यानी शर्मगाह अक्सर लोग जुबान और शर्मगाह के गलत इस्तेमाल कि वजह से जहन्नुम मै जायेंगे! 

           (जन्नत कि ज़मानत)

हदीश पाक का मफ़हूम है! जो शख्स मुझे अपनी जुबान और शर्मगाह कि सही इस्तेमाल कि ज़मानत दे दे! मै उसके लिए जन्नत मै घर दिलाने का जामिन हूँ! इससे जुबान के सही इस्तेमाल कि अहमियत का अंदाजा लगाना आसान है! 

           (बद जुबानी से बचो)

नबीये करीम सालाल्लाहों अलैहे बसल्लम ने फ़रमाया! तुम अपने माँ बाप को गालियां न दिया करो! 

सहाबाये किराम रजि अल्लाहो तआला अन्ह ने पुछा ऐ अल्लाह के सालाल्लाहों अलैहे बसल्लम अपने माँ बाप को कौन गालिया देता है! तुम किसी के माँ बाप को गालिया दोगे! 

वो जवाब मै तुम्हारे माँ बाप को गालिया देगा! ये ऐसा हि है! जैसे तुमने अपने माँ बाप को गाली दी! 

          (जरा संभल के रहना)

बाज लोग महफिल मै बैठकर अपनी आज़िज़ी और अपनी मिसकीनी का मजाहहिरा करते है! दरे हकीकत वो कह रहे होते है! कि अर्फूनी (मुझे पहचानो) दानाओ का कॉल है! कि उलमा कि महफिल मै बैठो तो जुबान संभाल कर बैठो! 

हाक़िम कि महफिल मै बैठो तो निगाहे संभाल कर बैठो! और अल्लाह बालो कि सोहबत मै बैठो तो दिलो को संभाल कर बैठो! आम तोर पर देखा गया है! कि लम्बी जुबान इंसान कि उमर को छोटा कर देती है! कियु कि जितना ज्यादा बोलेगा उतना अपने सर पर ज्यादा मुसीबत लेगा! 

  (रूहानी तदावीर किताब)

हज़रत मौलाना पीर ज़ूलफिकार अहमद साहब नक्सबंदी 
मौलाना मुहम्मद रुहुल्लाह नक्सबंदी गफूरी 

Post a Comment

और नया पुराने