नियत कि खराबी कि वजह से पहाढ़ो जैसे बढे अमल क़यामत के दिन हबायम मसूरा बना दिए जायेंगे! और वो छोटे छोटे अमल जिनको इंसान करके भूल जाता है! नियत कि इखलास कि वजह से क़यामत के दिन इंसान कि बख्सिस का सबब बन जायेंगे
हदीश पाक मै आया है! कि एक बंदा क़यामत के दिन अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के हुज़ूर पेश किया जायेगा! इस के हक़ लेने वाले बहुत होंगे! जब इनको इनका हक़ दे दिया जायेगा! तो इस बन्दे के सारे अमल ही ख़तम हो जायेंगे!
देखने वाले ये समझेंगे कि ये बंदा अब जरूर जहन्नुम मै जायेगा! मगर परबर दिगारे आलम फरमायेगा! इसके नामाये आमाल के सब आमाल अगर छे लोगो मै तकसीम हो गए! लेकिन ये भी लिखा हुआ है!
कि इस बन्दे कि नियत सब के लिए हमेशा के लिए भलायी कि होती थी! इस बन्दे कि भलायी कि ये नियत मुझे इतनी पसंद आयी कि इस नियत पर मैंने इस बन्दे कि बखशिस फरमा दी!
एक रिबायत मै आया है! कि क़यामत के दिन एक बंदा पेश किया जायेगा! इसके नामाये आमाल मै हज का और उमरे का और ना मालूम कितनी शब बेदारियो का सबाब लिखा होगा!
वो बढ़ा हैरान होगा! कि रब्बे करीम मैंने तो हज किया ही नहीं उमरा भी नहीं किया या इतने नहीं किये जितने लिखें हुए है! या मेरी उम्र तो कम थी! और हजो कि तादाद इससे भी ज्यादा है!
इसके जबाब मै इसको कहा जायेगा! कि तुमने अमल थोड़ा ही किया था! लेकिन तुम्हारे दिल के अंदर हर साल अल्लाह के दर पर हाजरी देने कि नियत होती थी!
हर रात मै तहज़जूद पढ़ने कि नियत होती थी! वो जो तुम कहते थे! ऐ काश अगर मेरे बस मै होता अगर वासाइल होते अगर मेरे हालत मवाफिक होते तो मै हज और उमरा करता
वो जो तुम्हारे दिल से एक आरजू और तमन्ना उठती थी! इस तमन्ना के इखलास को देखते हुए तो हम इस अमल का सबाब तुम्हारे नामाये आमाल मै लिख दिया करते थे!