गोस ऐ आज़म का मस्ताना /gos ae aazam ka mastana lyrics


 गोस ऐ आज़म का मस्ताना 
वो है! खुआजा का दीबाना 


जो मोहम्मद पे दिल से फ़िदा है! 
वो बरेली का अहमद रजा है! 


दसवीं तारीख़ थी! माह ऐ सव्वाल था! 
घर नकी खान के बेटा पैदा हुआ 


नाम अहमद रजा जिसका रखा गया 
आला हज़रत ज़माने का वो बन गया 


इल्म और हिकमत का खजाना 
वो मुजददीद ऐ जमाना 


नजदीयो से जो तन्हा लढा है! 
 वो बरेली का अहमद रजा है! 


जब वो पैदा हुआ नूरी साये तले 
वादी ऐ नज्द मैं आ गए जल जले 


कैसे उसकी फज़ीलत का सूरज ढले 
जिसकी अज़मत का सिक्का अरब मैं चले 


जिस का खाये उस का गाये 
उसका नारा हम लगाए 


जिसका नारा अरब मैं लगा है! 
वो बरेली का अहमद रजा है!