वो शहर ऐ मोहब्बत जहाँ मुस्तफा है!/vo sahar ae mohabbat jaha mustafa hai lyrics


 वो शहर ऐ मोहब्बत जहाँ मुस्तफा है!
वही घर बनाने को जी चाहता है! 


सितारों से ये चाँद कहता है! हर दम 
तुम्हे किया बताऊ वो टुकड़ो का आलम 
इशारे मैं आका के इतना मजा था! 
की फिर टूट जाने को जी चाहता है! 


 वो शहर ऐ मोहब्बत जहाँ मुस्तफा है!
वही घर बनाने को जी चाहता है!


 वो नन्हा शा असगर जो ऐढी रगढ़ कर 
यही कह रहा था! तो खेमे मैं रोकर
अरे बाबा! मैं पानी का प्यासा नहीं हूँ! 
मेरा रण मैं जाने को ये जी चाहता है! 


 वो शहर ऐ मोहब्बत जहाँ मुस्तफा है!
वही घर बनाने को जी चाहता है! 


जो देखा है! रु ऐ जमाले ऐ रिसालत 
तो ताहिर उमर मुस्तफा से ये बोले 
बढ़ी आपसे दुश्मनी थी! मगर अब 
गुलामी मैं आने को ये जी चाहता है! 


 वो शहर ऐ मोहब्बत जहाँ मुस्तफा है!
वही घर बनाने को जी चाहता है!