कई लोग जाते है ऐसे हरम को /kai log jaate hai aise haram ko lyrics
कई लोग जाते है ऐसे हरम को
की जैसे हरम हो! कदम दो कदम को
बढ़ा खूब उनका मुकद्दर है! मोला
ये औकात वैसी है! मेरी कहा
कभी गिर्द कावे के मैं भी तो घुमु
कभी मैं भी काबे की चादर को चुमू
मुझे भी दिखा दे खुदारा हरम को
बरसती है! रहमत की वारिस जहाँ
कभी सँग ऐ असबद का वोसा अता हो!
की मरने से पहले ख़तम हर खता हो!
तमन्ना मेरे रब पूरी ये करदे!
इसी जुस्टजु मैं हूँ! जीता यहाँ
की कावे की रौनक को मैं भी तो देखु
दिखा मुझको कावा मेरे प्यारे मोला
की मुझको लगी है! ये लगन मेरे मोला
की चुमू मैं हिज़रे असबद वहां
मैं अक्सर ही यादो मैं कावे को पहुंचा
मैं कितना हूँ! तड़पा मैं कितना हूँ! रोया
है! बेचैन मोला ये दिल मेरा बेचैन कितना
करू कैसे मैं ये लबों से बया