महबूब की महफिल को महबूब सजाते है! /mahboob ki mahfil ko mahboob sajate hai lyrics
महबूब की महफिल को महबूब सजाते है!
आते है! वही जिनको सरकार बुलाते है!
जिनका भरी दुनिया मैं कोई भी नहीं बाली
उनको भी मेरे आका सीने से लगाते है!
वो लोग खुदा शाहिद किस्मत के सिकंदर है!
जो सरबर ऐ आलम का मिलाद मनाते है!
जो शाह ऐ मदीना को लजपाल समझते है!
दामन ऐ तलब भर कर महफिल से वो जाते है!
इस आस पर जीता हूँ! कहदे कोई आकर
चल तुझको भी मदीने मैं सरकार बुलाते है!