ऐ सवा मुस्तफा से कह देना गम के मारे सलाम कहते है! /Ae Sava Mustafa Se Kah Dena Gam Ke Maare Salaam Kahte Hai Lyrics


 ऐ सवा मुस्तफा से कह देना 
गम के मारे सलाम कहते है! 
सब्ज गुम्बद कि उन बहारो को 
दिल हमारे सलाम कहते है! 


 ऐ सवा मुस्तफा से कह देना 
गम के मारे सलाम कहते है! 
याद करते है! उनको शाम औ शहर 
दिल हमारे सलाम कहते है!


अल्लाह अल्लाह! हुज़ूर कि बाते 
मरहवा रंग औ नूर कि बाते 
चाँद जिन पर निसार होता है!
 और सितारे सलाम कहते है! 


अल्लाह अल्लाह! हुज़ूर के गेसु 
भीनी भीनी महकती वो खुसबू 
जिससे मामूर है! फजा हर सू
 वो नज़ारे सलाम कहते है! 


जब मोहम्मद का नाम आता है! 
रहमतों का प्याम आता है! 
लब हमारे दुरूद पढ़ते है! 
दिल हमारे सलाम कहते है! 


सब्ज गुम्बद का आँख मै मंजर
 और तसव्वुर मै आपका मिम्बर 
सामने जालिया है! रोजे कि
 दिल हमारे सलाम कहते है! 


जइर ऐ तैवा तू मदीने मै 
प्यारे आका से इतना कह देना 
आप कि गर्द ऐ राह को आका
 चाँद तारे सलाम कहते है! 


जिक्र था! आख़िरी महीने का
 छिड़ गया तस्करा मदीने का 
हाज़ियों मुस्तफा से कह देना
 बे सहारे सलाम कहते है! 


ऐ खुदा के हबीब प्यारे रसूल
 ये हमारा सलाम कीजिये क़ुबूल 
आज महफिल मै जितने हाजिर है!
 मिल के सारे सलाम कहते है! 


गम के बादल तमाम छटने लगे
 परदे आँखों से सारे हटने लगे 
जो तलातुम बने हुए थे! सुहैल
 वो किनारे सलाम कहते है!