मुस्तफा आपके जैसा कोई आया ही नहीं /mustafa apke jaisa koi aaya hi nahi lyrics

 मुस्तफा आपके जैसा कोई आया ही नहीं 
आता भी कैसे जब अल्लाह ने बनाया ही नहीं 


कोई सानी न है! रब का न मेरे आका का 
एक का जिस्म नहीं और एक का साया ही नहीं 


क़ब्र मैं जब कहा सरकार ने ये मेरा है! 
फिर फरिश्तो ने मुझे हाथ लगाया ही नहीं 


आप ने जब से नवाजा है! या रसूलुल्लाह 
मैं ने दामन किसी चौखट पे बिछाया ही नहीं 


लोट कर आ गया मक्के से मदीने गया ही नहीं 
कैसे जाता तुझे आका ने बुलाया ही नहीं 


जब से दरवाजे पर लिखा मैंने आला हज़रत 
कोई गुस्ताख़ ऐ नवी घर मैं मेरे आया ही नहीं 


जुल्फ वल्लईल है! रुख बद्दुहा मा जाग आँखे 
इस तरह रब ने किसी को सजाया ही नहीं 


जिसने सरकार के चेहरे की जियरत की है! 
उसकी नजरों मैं कोई और समाया ही नहीं