मुकद्दर को जगाना चाहता हूँ! /mukaddar ko jagana chahta hoo lyrics naat sareef

 मुकद्दर को जगाना चाहता हूँ! 
मदीना मैं भी जाना चाहता हूँ! 

कहा सिद्दीक ने जो कुछ है! अपना 
शह दी पर लुटाना चाहता हूँ! 

बसा कर पहले कावे को नजर मैं 
मदीना दिल बनाना चाहता हूँ!

मेरी बेटी कनीजे फातिमा हो! 
उसे ऐसा बनाना चाहता हूँ! 

मेरे आका तेरे रोजे की जाली 
मैं सीने से लगाना चाहता हूँ! 

गुलाम उनका किसी से कम नहीं है! 
ज़माने को बताना चाहता हूँ!