मजबूर हूँ! लाचार हूँ! सरकार संभालो /majboor hoo lachaar hoo sarkaar sambhalo lyrics naat sareef

 मजबूर हूँ! लाचार हूँ! सरकार संभालो 
तैवा का तलबगार हूँ! तैवा मैं बुलालो 

कब तक मैं जुदा होकर रहू भरे बाजार मैं 
आका मुझे अब शहरे मदीना मैं बुलालो 

झोली मैं मेरी डाल दो हुसैन का सदका 
हुसैन के नाना मेरी फ़रियाद ना टालो 

जो आन की रजा है! वही मोला की रजा है! 
रब को जो मनाना है! तो उनको मना लो 

दमाने तलब जब भी फैलाया है! किसी ने 
फ़ौरन ही शहन शाह दो आलम ने कहा लो 

अल्लाह के दरबार मैं पैसानी झुका कर 
जन्नत का महल अपने मुकद्दर मैं लिखा लो 

हो जाये फ़िदा चाँद भी तेरे चेहरे की चमक पर 
खाके दरे महबूब जरा रुख पर लगा लो