तदवीर नंबर 3
(तवाजै रफअत शान का सबब)
इसके बालमुकाबिल तवाजै है! अपने आप को झुकाना और मिटाने का नाम तवाजै है! अगर ये तवाजै अल्लाह के लिए हो तो ये महमूद है! कियु कि हदीस पाक मै आया है!
(मन तवाजाअ लिल्लाहि रफाआहुल लाहु)
जिसने अल्लाह के लिए तवाजै इख़्तियार कि अल्लाह ने उसको बुलंदी अता कर दी
ये भी तवाजै कि अलामत है! कि इंसान मामूली काम करने पर अपने नफ़्स मै बोझ महसूस न करें! कई मरतवा इंसान किसी छोटे से काम को अपनी शान के खिलाफ समझता है!
भाई शान तो अल्लाह को हि सजती है! बन्दे कि किया शान है! इस लिए हमारे अकावीर मामूली काम को भी अपने लिए बुरा नहीं समझते थे! वो अपना काम अपने हाथ से कर लिया करते थे!
जिससे वो सावित हो कि वो कुछ है! अगर इनको अल्लाह तआला कोई जाहिरी या बतिनी नेमते अता फरमा देते थे! तो वो इन पर इतराते भी नहीं थे! बल्कि फिर भी तवाजै इख़्तियार करते थे!
(अपनी मै को मिटालो)
अपनी मै को मिटालो याद रखना कि जो अपनी मै को नहीं मिटाता फिर अल्लाह तआला खुद उसकी मै को मिटाता है! और जिसकी मै को अल्लाह मिटाता है!
फिर उसका तमाशा दुनिया देखती है! इस से पहले कि हमारी मै को तोड दे! हम अपनी मै को खुद तोड़ ले इसे कहते है! नफ़्स को मिटाना
(तशववुफ कि बुनियाद)
अपने नफ़्स को मिटा देने बाली ये नेमत ऊपर से चली आ रही है! आज लोग पूछते है! कि तशववुफ कि बुनियाद कहा से है!
भाई ये अपने आप को मिटा देना नफ़्स मै तकब्बूर जैसी बीमारियो को ख़तम करना हि तो तशववुफ है! और ये तालीमात तो हमें सहाबाये किराम और सलफे सुआलेहीन से मिलती है!
(खलीफाये बक्त कि तवाजै)
सय्यदना सिद्दीके अकबर रजि अल्लाहो तआला अन्ह बक्त के खलीफा भी थे! और अपने घर मै बकरी का दूध भी निकालते थे!
और अगर बाजार से कोई चीज खरीदते थे! तो अपने सर पर उठा कर लाते थे! इसको अपनी शान के खिलाफ नहीं समझते थे!
इसलिए कि इनकी तबियत के अंदर तवाजै थी! सय्यदना अली रजि अल्लाहो तआला अन्ह भी अपने जमानाये खिलाफत मै अपना सामान सर पर उठा कर घर लाया करते थे!
(सय्यदना उमर बिन ख़तताब रजि अल्लाहो तआला अन्ह कि आज़िज़ी)
सय्यदना उमर बिन ख़तताब रजि अल्लाहो तआला अन्ह ने अपने आप को कैसे मिटाया! एक मरतवा किसी जिहाद से माले गनीमत आया! कैदी भी आये! अपने देखा तो ख़ुश हुए! इसके बाद लोगो से कहा!
जरा मेंबर के करीब हो जाओ! लोग मेंबर के करीब हो गए! फिर आपने लोगो कि तरफ मुतावज्जे होकर अपने आप को कहा! उमर तू वही तू है!
जिसकी माँ ख़ुशक गोस्त चबाया करती थी! अरब मै ये गुरबत कि अलामत होती थी! कि जिन को खाने का कुछ वाफर हिस्सा मेसर न होता था! वो भूक कि शिद्दत कि वजह से वो ख़ुशक गोस्त चबाया करते थे!
ये बात कह कर सय्यदना उमर बिन ख़तताब रजि अल्लाहो तआला अन्ह मेंबर से नीचे उतर गए! सहाबाये किराम हैरान हो गए! कि हमें अमीरुल मोमिनिन ने इखट्टा किया था! तो किया यही कुछ कहना था!
बाद मै उन्होंने सय्यदना उमर बिन ख़तताब रजि अल्लाहो तआला अन्ह से पुछा हज़रत आपने इतने लोगो को इखट्टा भी किया! कि ये बात सुनो और कोई ख़ास बात भी नहीं कि बस यही कहा उमर तू उस माँ का बेटा है!
जो ख़ुशक गोस्त चबाया करती थी! आखिर किया वजह है! हज़रत सय्यदना उमर बिन ख़तताब रजि अल्लाहो तआला अन्ह
जवाब दिया जब कैदी आये! और माले गनीमत भी आया! तो मेरे दिल मै ये ख्याल आया! कि उमर अल्लाह तुझे किया शान दी है! कि तेरे ज़माने मै इस्लाम को फुतुहात हो रही है!
मैंने महसूस किया मेरे नफ़्स के अंदर कही अज़ब पैदा न हो जाये! मैंने इसका ये इलाज तजवीज किया! कि सारे लोगो को बुलाकर एक ऐसी बात कहदी!
जिसने मेरे अंदर से खुद पसंदी को ख़तम कर के सुब्हानल्लाह वो अपने नफ़्स को यूँ पामाल करते थे! इधर नफ़्स के असर ढाने सर उठाने कि कोशिस कि इधर इन्होने इसके सर पर चोट लगाई!
बस जरा इसी बात पर नफ़्स को दवा पिला देते थे! तो मालूम हुआ कि हज़रत अपने नफ़्स पर हर बख्त निगाह रखते थे!

Mashallah
जवाब देंहटाएंएक टिप्पणी भेजें