मोजीजा कितना निराला ये हुआ मेराज मैं


 मोजीजा कितना निराला ये हुआ मेराज मैं 
ला मक़ाँ पहुंचे हबीब ऐ किबरिया मेराज मैं 


हर तरफ शादी रची है! हर कोई है! सादमा 
आज महबूब ऐ खुदा दूल्हा बने मेराज मैं 


प्यारे आका के कदम पर हज़रत ऐ जिबरील ने 
अपने नूरानी लबों को रख दिया मेराज मैं 


जान ऐ ईमाँ जान ऐ इंशा की सलामी के लिए 
आसमा पर मुन्तजिर थे! अम्बिया मेराज मैं 


हूर औ गिलमा और फरिस्ते मरहवा कहने लगे 
जिस घड़ी पहुंचे फलक पर मुस्तफा मेराज मैं 


पेश करके अपना कांधा पा गए आला मक़ाम 
गोस ऐ आज़म पेशवा ऐ औलिया मेराज मैं 


हम गुनाह गारो से कितना प्यार है! सरकार को 
आप ने हक मैं हमारे की दुआ मेराज मैं 


गर्म बिस्तर भी रहा जंजीर भी हिलती रही 
आना जाना मुस्तफा का यूँ हुआ मेराज मैं