या रब मेरी सोई हुयी तक़दीर जगा दे!/ya rab meri soi huyi takdeer jaga de
या रब मेरी सोई हुयी तक़दीर जगा दे!
आँखे मुझे दी है! तो मदीना भी दिखा दे!
सुनने की जो कुववत मुझे बख्शी है! खुदा बंद
फिर मस्जिदे नववी की अज़ाने भी सुना दे!
हूरो की ना गिलमा की ना जन्नत की तलब है!
मदफन मेरा सरकार की बस्ती मैं बना दे!
मुद्दत से मैं इन हाथो से करता हूँ! दुआएं
इन हाथो मैं अब जाली सुनहरी भी थमा दे!
मुँह हश्र मैं मुझको ना छुपाना पढ़े या रब
मुझको तेरे महबूब की चादर मैं छुपा दे!
इशरत को भी अब खुश्बूए हस्सान अता कर
जो लफ्ज़ कहे है! उन्हें तू नात बना दे!